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महान साहित्य साधक, राष्ट्रचेतना के अमर गायक और ‘वन्दे मातरम्’ जैसे अमर राष्ट्रीय गीत के रचयिता, भारतीय नवजागरण के अग्रदूत बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय जी केवल एक महान साहित्यकार ही नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा के स्वर, राष्ट्रभक्ति के प्रेरणास्रोत और सांस्कृतिक चेतना के अमिट हस्ताक्षर थे। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी, जनमानस में राष्ट्रीय भावना का संचार किया और मातृभूमि के प्रति समर्पण का ऐसा भाव जगाया, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
उनकी अमर कृति ‘आनंदमठ’ और उसमें समाहित ‘वन्दे मातरम्’ केवल शब्द नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, समर्पण, स्वाभिमान और संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।
उनकी लेखनी में राष्ट्रप्रेम, संस्कृति, अध्यात्म, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। बंकिम बाबू ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं माना, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र के जागरण का सशक्त साधन बनाया। यही कारण है कि उनका योगदान भारतीय साहित्य और राष्ट्रीय जीवन दोनों में सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

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