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जब बेटा बिस्तर पर था... मां उसके सपनों को पढ़ रही थी

कहते हैं, मां अपने बच्चों के सपनों के लिए हर मुश्किल से लड़ जाती है। जब फेफड़ा कोलेप्स होने की वजह से गुंजन कुमार तीन महीने तक बिस्तर पर रहे, तब उनका IIT का सपना टूटता नजर आ रहा था। लेकिन मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने ऑनलाइन क्लास देखीं, अपने हाथों से नोट्स बनाए और बेटे की पढ़ाई जारी रखी। आखिरकार मां की मेहनत और बेटे के हौसले ने मिलकर वह कर दिखाया, जो कभी नामुमकिन लग रहा था कि गुंजन ने IIT दिल्ली में दाखिला हासिल कर लिया।

यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि मां के अटूट विश्वास और बेटे के संघर्ष की मिसाल है।

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