तपती धूप में सिर्फ एक रस्सी और बांस के सहारे वो अपनी किस्मत तौलती है जहाँ उम्र खेलने पढ़ने की है वहाँ ये नन्ही बच्ची पेट की खातिर ज़िंदगी का संतुलन सीख रही है इस हुनर को प्रणाम भी है और इसके पीछे की मजबूरी पर दर्द भी