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जिस वीर का नाम इतिहास की किताबों से लगभग गायब कर दिया गया… आखिर कौन थे मेजर दुर्गा मल्ला, जिनकी आखिरी मुस्कान ने अंग्रेजों को भी हिला दिया? | OLDISGOLDFILMS
भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा होते ही हमारे मन में भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान क्रांतिकारियों की छवि उभर आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी वीर था, जिसने भारत माता की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया, फिर भी उसका नाम इतिहास की मुख्यधारा में कभी वह स्थान नहीं पा सका जिसका वह वास्तविक हकदार था। यह कहानी है मेजर दुर्गा मल्ला की, जो भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के पहले भारतीय गोरखा शहीद बने। उनका जीवन केवल वीरता की कहानी नहीं, बल्कि देशभक्ति, त्याग, प्रेम, आत्मसम्मान और बलिदान का ऐसा अध्याय है जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए। आज OLDISGOLDFILMS आपको उस महानायक की कहानी सुनाने जा रहा है, जिसका नाम शायद आपने पहली बार सुना होगा।
एक साधारण लड़का आखिर कैसे बन गया भारत की आज़ादी का अमर योद्धा?
1 जुलाई 1913 को उत्तराखंड के देहरादून के निकट डोईवाला में एक भारतीय गोरखा-नेवार परिवार में दुर्गा मल्ला का जन्म हुआ। उनके पिता गंगा राम मल्ला सेना से जुड़े हुए थे और परिवार में अनुशासन, साहस तथा देशभक्ति का वातावरण था। बचपन से ही दुर्गा मल्ला ने अपने समाज की वीर परंपराओं को देखा और सुना। गोरखा समुदाय सदियों से अपनी बहादुरी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन दुर्गा मल्ला केवल सैनिक बनकर संतुष्ट नहीं होना चाहते थे। उनके भीतर देश को आज़ाद देखने का सपना पल रहा था। उस समय भारत अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था और हर ओर आज़ादी की लहर उठ रही थी। यही माहौल उनके व्यक्तित्व को आकार देने लगा।

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