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वेदों के मर्मज्ञ डा. फतह सिंह का जन्म ग्राम भदेंग कंजा (पीलीभीत, उ.प्र.) में आषाढ़ पूर्णिमा 13 जुलाई, 1913 को हुआ था। जब वे कक्षा पांच में थे, तो आर्य समाज के कार्यक्रम में एक वक्ता ने बड़े दुख से कहा कि ऋषि दयानन्द के देहांत से उनका वेदभाष्य अधूरा रह गया। बहुत छोटे होने पर भी फतह सिंह ने मन ही मन इस कार्य को पूरा करने का संकल्प ले लिया।

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