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जापान के पूर्व राजदूत यासुकुनी एनोकी ने भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि जापान में पूजे जाने वाले अनेक देवताओं की जड़ें भारतीय परंपरा और बौद्ध धर्म के माध्यम से पहुंची हैं। उन्होंने दावा किया कि जापान के 80% से अधिक देवता मूल रूप से भारतीय देवताओं से जुड़े हुए हैं, हालांकि अधिकांश जापानी इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध से परिचित नहीं हैं।
यासुकुनी एनोकी ने उदाहरण देते हुए बताया कि वह टोक्यो के बाहरी क्षेत्र किचिजोजी (Kichijōji) में रहते हैं। उनके अनुसार, इस स्थान का नाम 'किचिज़ो' देवी से जुड़ा है, जिन्हें वह भारतीय परंपरा की माता लक्ष्मी से संबंधित मानते हैं। इसी कारण वह मजाकिया अंदाज में स्वयं को "लक्ष्मी टाउन" का निवासी भी कहते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंध हजारों वर्षों पुराने हैं और बौद्ध धर्म के प्रसार के साथ भारतीय देवताओं एवं परंपराओं का प्रभाव जापानी संस्कृति तक पहुंचा। यह वक्तव्य यासुकुनी एनोकी के विचारों को दर्शाता है। जापान में भारतीय मूल से जुड़े देवताओं और उनके ऐतिहासिक संबंधों पर विभिन्न इतिहासकारों और शोधकर्ताओं द्वारा अलग-अलग अध्ययन और व्याख्याएं प्रस्तुत की गई हैं।
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