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11 साल की उम्र में पिता को खोया, लेकिन हौसला कभी नहीं खोया। :flag-in:
हर चुनौती के सामने डटकर खड़ी रहीं कैप्टन शिवा चौहान। पिता के निधन के बाद उनकी माँ उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर खड़ी रहीं, जबकि बड़ी बहन ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। परिवार के इसी अटूट विश्वास ने उनके भारतीय सेना की वर्दी पहनने के सपने को उड़ान दी।
सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने SSB इंटरव्यू में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) से प्रशिक्षण लेकर कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में अधिकारी बनीं। इसके बाद उन्होंने लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित की, 508 किलोमीटर के 'सूरा सोई' साइकिलिंग अभियान का नेतृत्व किया और सियाचिन बैटल स्कूल में विशेष प्रशिक्षण भी पूरा किया।
2 जनवरी 2023 को कैप्टन शिवा चौहान ने इतिहास रच दिया। वह सियाचिन के कुमार पोस्ट पर ऑपरेशनल तैनाती पाने वाली भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बनीं। 15,632 फीट की ऊंचाई और -50°C तक गिरते तापमान वाले दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में उन्होंने इंजीनियरिंग ऑपरेशंस, सैन्य ढांचे के रखरखाव और अपनी टीम का नेतृत्व किया।
कैप्टन शिवा चौहान की कहानी हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, अगर माँ का विश्वास, परिवार का साथ और खुद पर भरोसा हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

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