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कोई नहीं चाहता कि सोनम वांगचुक की मौत हो।

आज अभिजीत दिप्टे ही उनकी जान बचा सकते हैं। उन्हें भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए मनाएँ और तुरंत अस्पताल ले जाएँ।

अगर अभिजीत अपनी बात रखना चाहते हैं, तो वे स्वयं भूख हड़ताल शुरू कर सकते हैं, लेकिन सोनम वांगचुक को बख्श दें। किसी बुज़ुर्ग की ज़िंदगी को राजनीतिक मुहिम का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।

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