भगवान से भी कुछ माँगना हो, तो पहले सब्र रखना पड़ता है...
लेकिन अगर ज़िद से कुछ माँगना हो, तो बस पिताजी से माँग लेना...
क्योंकि वो अपनी हैसियत नहीं, अपने बच्चे की मुस्कान देखकर फैसला करते हैं।

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