और अंत में वही हुआ जिसका अंदेशा हम सभी को था...! सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता पूरे देश को थी, उन्हें तो अस्पताल ले जाना ही था। अब कम से कम उनके सेहत को लेकर तसल्ली होगी।
पर अब वह हुआ जो स्क्रिप्ट लिए डिप्के भारत आए थे...एयरपोर्ट पर उनकी गिरफ्तारी होगी! न भी हुई तो मारपीट होगी। पर नहीं हुई।
अनशन के दौरान मारपीट होगी...पुलिस द्वारा धमकाया जाएगा...पर ऐसा कुछ न हुआ।
कचोरी समोसा खा खाकर उकताए अभिजीत डिप्के...सोनम को छोड़कर रोज की तरह जब वो किसी दोस्त के घर फ्रेश होने गए, पुलिस उनके स्वास्थ्य को देखते हुए सोनम को ले गई।
अब डिप्के कह रहे हैं उनके साथ मारपीट हुई...कभी कह रहे हैं गला द बाया...कभी कह रहे मुझे घसीटा तो कभी कह रहे मुझे धमकाया गया। यह सब कब हुआ.. कैसे हुआ वो डिटेल भी वो सोच कर मीडिया को बताएंगे।
वैसे न्यूज़ के अनुसार;
बीती शाम हुई दिल्ली पुलिस के टॉप अफसरों की मीटिंग में ये प्लान बना था।
ऑपरेशन जंतर मंतर के लिए एक कोड तय हुआ ' सफेद चादर ' ! दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों को सफेद टीशर्ट में जंतर मंतर भेजा गया....करीब दस जवान मंच पर पहुंचते ही चादर को फैलाते हैं, और सोनम से अस्पताल चलने की रिक्वेस्ट करते हैं।
सोनम वांगचुक इधर उधर एक सेकंड देखते हैं। उन्हें अभिजीत और दाहिया कहीं दिखते तक नहीं। तीन चार लेफ्ट की कार्यकर्ता हंगामा करने की कोशिश करती हैं। पर उन्हें तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में ले जाया गया।
वे फिलहाल सफदरजंग में हैं...स्टेबल हैं और होश में हैं।
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इधर अभिजीत और दूसरे कॉकरोच भी अनशन शुरू करने की कोशिश में हैं। वे सारे युवाओं और स्टूडेंट्स को सड़कों पर उतरकर 'शांतिपूर्ण' आंदोलन के लिए उकसा रहे हैं। आखिरकार उन्हें हीरो बनने का यह अंतिम अवसर मिला है।
देखते हैं क्या होता है?
रुबिया लियाकत ने एक बहुत सुंदर बात कही हैं;
इतिहास नायकों को याद रखता हैं, मोहरों को नहीं!
बाकी तो...
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टीशा
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