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जंतर मंतर के प्रोटेस्ट ने ऐसे कई सौ गुण्डे थे जो बेरहमी से मार रहे थे कोई ड्रेस नहीं कोई बैच नंबर नहीं था जब पूछा जाता था कि कौन हो तुम तो कोई जवाब नहीं देते थे और मारने लगते है सवाल ये है कि ये पुलिस वालों के साथ और पत्थर बाजी भी ऐसे लोगों ने पहले किया फिर यही लोग लाठी उठा कर पीटने लगे जितने पुलिस वाले थे इसमें 80% ऐसे थे जो मार कम रहे थे और भगाने की पूरी कोशिश कर रहे थे लेकिन ये जो RSS के गुंडे थे ये खोज खोज कर मार रहे थे क्या सरकार इनको खोज कर इनकी पहचान कराएगी
सवाल ये है कि ये पूरा सिनेमैटिक तरीके पहले इसको हिंसात्मक बनाया गया और फिर लाठिया बरसाईं गई और सबसे बड़ा सवाल RAF वाले कहा थे इन लोगों से पूछ क्यों नहीं की तुम कौन हो किस डिपार्टमेंट के हो
खुलेआम RSS के गुंडों से हिंसा कराई गई है इन लोगों को खोजा जाए और पता किया जाए कि कौन है ये लोग

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