3 uur - Vertalen

19 वर्षीय अथर्व चतुर्वेदी ने यह दिखा दिया कि जानकारी, तैयारी और आत्मविश्वास के दम पर व्यवस्था की खामियों को भी चुनौती दी जा सकती है।
जबलपुर के रहने वाले अथर्व ने NEET परीक्षा दो बार क्वालिफाई की, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS कोटे के तहत प्रवेश के लिए स्पष्ट राज्य नीति न होने के कारण उन्हें एडमिशन नहीं मिल पा रहा था। आर्थिक तंगी की वजह से वे वकील नियुक्त नहीं कर सके, इसलिए उन्होंने स्वयं याचिका तैयार की और अदालत में अपनी दलीलें खुद पेश कीं।
मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने विशेष संवैधानिक शक्ति Article 142 का प्रयोग करते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि NEET-उत्तीर्ण EWS अभ्यर्थियों को 2025–26 सत्र के लिए प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए, निर्धारित फीस के भुगतान की शर्त के साथ।
अदालत ने माना कि नीतिगत अस्पष्टता के कारण किसी पात्र छात्र को अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला केवल एक छात्र की व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है जो EWS Quota और MBBS Admission Policy से जुड़ी प्रक्रियात्मक कमियों का सामना कर रहे हैं।
Atharva Chaturvedi Supreme Court Case अब NEET 2026 EWS Admission और Article 142 Judgment के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुका है।

image