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CRPF के वीर कमांडेंट चेतन चीता वह नाम हैं, जिनकी कहानी, हिम्मत और निष्ठा देशभक्ति की मिसाल बन चुकी है। आतंकियों से लड़ते वक्त 9 गोलियां लगने के बावजूद भी वो उनसे लड़ते रहे। चेतन चीता ने ना सिर्फ मोर्चा संभाले रखा, बल्कि अपनी टीम की जान बचाते हुए ऑपरेशन को सफल भी बनाया।
आतंकियों के साथ इस मुठभेड़ में उनको 9 गोलियाँ लगी और उन्होंने अपनी एक आँख भी गवाई। और पूरे दो महीने तक कोमा में रहे उनकी इस बहादुरी के लिए उनको कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
CRPF कमांडेंट चेतन चीता की पत्नी उमा बताती हैं जब डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे, तब में इस अटूट विश्वास के साथ उनके बगल में खड़ी थीं कि वह ठीक हो जाएंगे।
दो बच्चों की मां उमा ने कहा, "उसकी आंखें बंद थीं, वह पूरी तरह से बेहोश था, लेकिन जैसे ही मैंने उसे सांस लेते देखा, मुझे पता चल गया कि वह बच जाएगा।"
चीता को अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही ऑपरेशन किया गया, जिसमें डॉक्टरों ने खो’पड़ी के उस हिस्से को हटा दिया जो गोली से क्षतिग्रस्त हो गया था। चीता 2 महीने तक कोमा में रहा और उसने एक महीना आईसीयू में बिताया।चेतन चीता की पत्नी ने कहा, “डॉक्टर कहते थे कि वह कोमा में हैं, लेकिन जब भी मैं उनसे मिलती और उनके हाथ पकड़ती, तो वह अपनी उंगलियां हिलाकर प्रतिक्रिया देते थे।
इससे मेरा यह विश्वास और मजबूत हो गया कि वह मेरे पास वापस लौटेंगे। डॉक्टरों ने चीता के ठीक होने को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया है। दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर से डिस्चार्ज होने के बाद चीता का घर पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। 🇮🇳💐

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