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"नव दशकों की तपस साधना की तपस्वी वंदनीय 'मौसीजी'"
नव दशकों की संघर्षशील किंतु सफल यात्रा की स्मृतियों को जीवंत अनुभव करने हेतु उसके इतिहास की अदृश्य व अद्वितीय साहस की गाथाओं को जानना अत्यंत आवश्यक है। पराधीन राष्ट्र की हजारों महिलाओं में राष्ट्रीयता की ज्योत जगाकर, अलौलिक व्यक्तित्व की धनी वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर "मौसीजी" ने वर्धा (महाराष्ट्र) में सन् 1936 को विजयदशमी के दिन विश्वव्यापी नारी संगठन "राष्ट्र सेविका समिति" की स्थापना की।
राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापिका व आद्य प्रमुख संचालिका वंद. मौसीजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल दशमी (5 जुलाई) 1905 में नागपुर के दाते परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम 'कमल' था। ऐसे प्रेरणादायक जीवन के कतिपय प्रेरक गुणों एवं सिद्धान्तों को अपने जीवन में भी स्थान देना हितावह है इसलिए कुछ प्रमुख बातों का यहाँ उल्लेख करना लाभकारी होगा। उनका सर्वप्रथम उल्लेखनीय गुण है उनके मन में राष्ट्रविमोचन की, राष्ट्रोन्नति की उत्कट लगन। उनमें राष्ट्रभक्ति का यह भाव बाह्य परिस्थिति के कारण उत्पन्न नहीं हुआ था अपितु उनका अभिजात स्थायी स्वभाव ही था।

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