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जब घायल हुआ हिमालय
ख़तरे में पड़ी आज़ादी,
जब तक थी सांस लड़े वो
फिर अपनी लाश बिछा दी,
संगीन पे धर कर माथा
सो गये अमर बलिदानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी।

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