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ॐ नमः शिवाय! 🙏✨
सर्वव्यापक, चराचर जगत के कण-कण में रमे भगवान रुद्र को कोटि-कोटि नमन। 🌿🔥💧
श्रीमद् श्वेताश्वतर उपनिषद का यह दिव्य श्लोक हमें याद दिलाता है कि ईश्वरीय चेतना किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त है:
"यो रुद्रो अग्नौ यो अप्सु य ओषधीषु यो रुद्रो विश्वा भुवना विवेश तस्मै रुद्राय नमो अस्तु॥"
🌿 सरल हिन्दी भावार्थ —
जो रुद्र देव अग्नि में हैं, जल में हैं, औषधियों और समस्त वनस्पतियों में समाए हुए हैं, और जिन्होंने इस संपूर्ण चराचर जगत में प्रवेश किया हुआ है (जो सर्वव्यापक हैं), उन सर्वशक्तिमान भगवान रुद्र को हमारा बारंबार नमस्कार हो। 🙌

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