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20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों का कहना है कि उनके शरीर पर लगे घाव जिंदगी भर रहेंगे, लेकिन आंदोलन में शामिल होने का उन्हें कोई पछतावा नहीं है।
कई छात्र अब भी इलाज करा रहे हैं। कुछ की कई सर्जरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ की आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद बेहद कम बताई गई है।
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि छात्रों के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया और बल का प्रयोग केवल प्रदर्शन के हिंसक होने तथा पथराव के बाद किया गया।
तीन सर्जरी के बाद खतरे से बाहर इरशाद
25 वर्षीय इरशाद शेख ने बताया कि उनके चेहरे, गर्दन और शरीर के ऊपरी हिस्से में कई पैलेट लगे थे, जिन्हें निकालने के लिए तीन सर्जरी करनी पड़ी। अब वह खतरे से बाहर हैं।
उन्होंने आगे के इलाज के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित अपने घर लौटने की योजना फिलहाल टाल दी है, क्योंकि डॉक्टरों ने पोस्ट-ऑपरेटिव जांच के लिए दिल्ली में ही रहने की सलाह दी है।
इरशाद ने कहा कि उनके माता-पिता चाहते हैं कि वह जल्द घर लौट आएं, लेकिन फिलहाल फॉलो-अप जांच पूरी होने तक उन्हें दिल्ली में रहना होगा।
आंदोलन सफल होने का संतोष
इरशाद ने कहा कि इतनी गंभीर चोटों के बावजूद उन्हें आंदोलन में शामिल होने का कोई अफसोस नहीं है। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने हमेशा सिखाया है कि हर घटना किसी अच्छे कारण से होती है।
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