~~~~मेरी मां~~~~
सृष्टि का समस्त माधुर्य व प्यार अपने में समेटे हुए एक शब्द है—"माँ"। प्रत्येक हृदय को समान रूप से आनंदित करने वाला शब्द। मुझे याद नहीं कि मैंने पहली बार कब तोतलाते हुए "माँ" कहा होगा। मां के साथ मेरे इस प्रथम शब्द को सुनने वाली माँ की सहेलियाँ भी वात्सल्य से सराबोर हो गई होंगी। मेरे जीवन की गाथा का एक बड़ा हिस्सा माँ के चारों ओर ही लिपटा हुआ रहा है। मैं माँ के जीवन संघर्ष पर एक छोटी-सी पुस्तक लिखना चाहता था, किंतु संयोग बार-बार गड़बड़ा जाता रहा है। मैं इस पुस्तक के माध्यम से उत्तराखंड की मातृशक्ति के निरंतर जीवन-संघर्ष की एक सजीव तस्वीर प्रस्तुत करना चाहता था। माँ मेरी होंगी, किंतु उनके संघर्ष का चित्रण समस्त उत्तराखंड की मातृशक्ति के संघर्ष का प्रतिनिधित्व करेगा।
यूं तो मां के जीवन संघर्ष वह कैसे उन्होंने अपने बच्चों को पाल इंसान बनाया इसके प्रसंग दुनिया भर में छपते रहते हैं मेरी मां या उत्तराखंड की मेरी माता है भी उसे सार्वभौम संघर्ष का हिस्सा है उत्तराखंड में भौगोलिक परिस्थितियों के चलते यह संघर्ष और अधिक दूर घर से वह कष्टतम कस्टमर है मैं उसे अनुभूति पुस्तक के रूप में देना चाहता हूं। यूं तो माँ के जीवन-संघर्ष और उन्होंने किस प्रकार अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें एक अच्छा इंसान बनाया, ऐसे प्रसंग दुनिया भर में छपते रहते हैं। मेरी माँ या उत्तराखंड की माताएं भी उस सार्वभौम संघर्ष का ही एक हिस्सा है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के चलते यह संघर्ष और भी अधिक दुरूह तथा कष्टसाध्य रहा है। मैं उसी अनुभूति को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करना चाहता हूँ। इधर अचानक मेरे स्वास्थ्य में भारी उतार-चढ़ाव आए हैं। इन्हें देखते हुए मैंने निश्चय किया है कि माँ पर पुस्तक लिखने से पहले मैं, माँ और मेरे जीवन से जुड़े कुछ अंतरंग प्रसंगों को आपके सम्मुख रखूँ। ये सभी प्रसंग मेरी माँ के व्यक्तित्व को परिलक्षित करते हैं और आज भी मेरी जीवन-पूँजी के रूप में मुझे निरंतर प्रेरित करते रहते हैं। जीवन के प्रत्येक पड़ाव के बाद मैं माँ से जुड़े प्रसंगों को स्मरण कर पुनः कमर कसता हूँ और आगे बढ़ जाता हूँ।