देश की प्रगति, समान अवसर और पारदर्शी व्यवस्था पर चर्चा हमेशा लोकतंत्र का हिस्सा रही है। कुछ लोगों का मानना है कि अब समय आ गया है कि जाति आधारित नीतियों की समीक्षा हो और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जहाँ हर व्यक्ति को उसकी योग्यता, मेहनत और क्षमता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।

इसी सोच के साथ "आरक्षण हटाओ, देश बचाओ" जैसे नारे भी सामने आ रहे हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन स्वस्थ संवाद और संवैधानिक दायरे में बहस ही किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत…

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