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तमिलनाडु के लाइब्रेरियन पालम कल्याणसुंदरम ने अपनी 35 साल की नौकरी की पूरी सैलरी, पेंशन और पुरस्कारों की राशि सहित कुल 30 करोड़ रुपये गरीब और अनाथ बच्चों के लिए दान कर दिए हैं। इस वजह से उन्हें 'भारत का सबसे अमीर गरीब' कहा जाता है।

1940 में तिरुनेलवेली के एक पिछड़े गांव में जन्मे कल्याणसुंदरम ने बचपन में ही अन्य गरीब बच्चों की स्कूल फीस और किताबों का खर्च उठाना शुरू कर दिया था। लाइब्रेरी साइंस में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्हें कॉलेज में लाइब्रेरियन की सरकारी नौकरी मिली थी। अपनी पूरी कमाई दान करने के बाद, खुद का पेट पालने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए वे अपनी नौकरी के बाद होटलों और लॉन्ड्री में काम करते थे।

इसके अलावा, 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भी प्रधानमंत्री की अपील पर उन्होंने देश की मदद के लिए अपनी सोने की चेन तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज को दान कर दी थी। कल्याणसुंदरम ने अपनी माँ की सीख पर चलते हुए अपना पूरा जीवन दूसरों की मदद में लगा दिया।

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