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यूपी में मदरसा शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला, सियासत भी तेज...

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले के अनुरूप यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड से उच्च शिक्षा (कामिल और फाजिल) से जुड़े अधिकार वापस लेने का फैसला किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब मदरसा बोर्ड केवल 12वीं स्तर तक की शिक्षा और उससे जुड़े कोर्सों का संचालन करेगा, जबकि उच्च शिक्षा से जुड़े कोर्सों के लिए अलग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

इस फैसले के साथ ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। उनके बयान पर समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बयान की आलोचना करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा के मुद्दे को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया।

वहीं सरकार और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का कहना है कि यह फैसला किसी नई नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में कामिल और फाजिल जैसे कोर्सों को उच्च शिक्षा के अलग ढांचे के तहत संचालित करने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

अब यह मा*मला सिर्फ मदरसा शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून, शिक्षा और राजनीति—तीनों के बीच बड़ी बहस का विषय बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाज़ी और चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।

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