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एक ऐसी रात… जिसकी सुबह 6 जिंदगियों के लिए कभी नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के महुली में 6 अगस्त की वो रात एक परिवार के लिए जिंदगी की आखिरी रात बन गई।
करीब 100 साल पुराने जर्जर मकान की छत… रात करीब 2 बजे अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी।
भारी बारिश और उमस के बीच परिवार के सात सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे।
जब तक किसी को कुछ समझ आता… तब तक पूरा परिवार मलबे के नीचे दब चुका था।
इस हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी रीता, बेटे नितिन, बहू माधुरी और दो मासूम पोते—माधव और अद्विक की दर्दनाक मौत हो गई।
सात लोगों में सिर्फ बड़ा बेटा अमन श्रीवास्तव किसी तरह मलबे से बाहर निकल पाया।
सोचिए… जिस घर में एक साथ सात लोग चैन की नींद सोए थे, सुबह वहां छह अपनों की लाशें थीं।
अमन ने अपनी आंखों के सामने अपने माता-पिता, भाई, भाभी और दोनों मासूम भतीजों को खो दिया।
उसके पास बची है तो सिर्फ यादें… और जिंदगी भर न भूल पाने वाला वो खौफनाक मंजर।
इस दुख की घड़ी में परिवार के दर्द को बांटने और उन्हें आर्थिक सहयोग देने के लिए पूर्व विधायक एवं बीजेपी नेता #बृजेश मिश्र ‘सौरभ’ जी परिवार के बीच पहुंचे।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता…
और कुछ जख्म ऐसे होते हैं जिन्हें वक्त भी आसानी से नहीं भर पाता।
आज जरूरत है कि इस पीड़ित परिवार को अकेला न छोड़ा जाए।
क्योंकि छह अपनों को खोने के बाद अमन के सामने अब सिर्फ गम नहीं… बल्कि पूरी जिंदगी की एक नई जंग खड़ी है