95 साल की उम्र में जब ज्यादातर लोग घर की चौखट तक सीमित हो जाते हैं, तब बुलंदशहर के हसनपुर जागीर गांव की सोन देवी ने एक ऐसा सपना देखा, जिसने पूरे परिवार को एक डोर में बांध दिया। उनकी बस एक ही इच्छा थी—जीवन में एक बार हरिद्वार जाकर मां गंगा के दर्शन करें, पवित्र स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें।
बढ़ती उम्र के कारण उनके लिए पैदल चलना संभव नहीं था, लेकिन उनके परिवार ने यह तय कर लिया कि दादी का सपना अधूरा नहीं रहने देंगे। फिर क्या था, लगभग 35 पोते एक साथ आगे आए और दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले गए। अब वापसी की यात्रा में भी सभी पोते बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर गांव की ओर लौट रहे हैं।
रास्ते भर जहां भी यह अनोखी कांवड़ यात्रा पहुंचती है, लोग भावुक हो जाते हैं। कोई दादी का आशीर्वाद लेता है तो कोई पोतों के संस्कार की तारीफ करता है। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है कि आज के दौर में भी ऐसे परिवार हैं, जहां बुजुर्गों की इच्छा को सबसे बड़ा सम्मान दिया जाता है।
यह दृश्य सिर्फ कांवड़ यात्रा का नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और परिवार की उस परंपरा का प्रतीक है, जो बताती है कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें अपने बुजुर्गों की खुशी को सबसे पहले रखा जाए।

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