3 hrs - Translate

जिस घर में कुछ घंटे पहले तक मां की आवाज, बच्चों की हंसी और परिवार की बातें गूंज रही थीं… उसी घर में सुबह सिर्फ मलबा था और एक ऐसा बेटा, जिसके पास रोने के लिए भी अपना कोई नहीं बचा था।”
प्रतापगढ़ के अमन श्रीवास्तव की कहानी सुनकर शायद ही किसी की आंखें नम न हों। एक ही रात में उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई। मां-बाप, छोटा भाई, पत्नी और दो मासूम बच्चे… छह लोग हमेशा के लिए उससे दूर हो गए और अमन अकेला जिं'दा ब'चा।
बुधवार रात करीब 2 बजे महुली गांव में लगातार बारिश के बीच परिवार ज'र्जर मकान के एक कमरे में सो रहा था। तभी अ'चानक छत भ'रभराकर नी'चे आ गि'री। देखते ही देखते पूरा परिवार मलबे में द*ब गया। अमन किसी तरह बाहर निकला और मदद के लिए ची'खने लगा।
करीब दो घंटे तक रेस्क्यू चला, लेकिन जब मलबा हटाया गया तो एक-एक करके छह अपनों के श'व बाहर निकले। गुरुवार को अमन ने कां'पते हाथों से अपने परिवार की छह चि'ताओं को मु'खाग्नि दी।
फूट-फूटकर रोते हुए अमन ने कहा, “मां-बाप, भाई, पत्नी, बच्चे… सब ख'त्म हो गए। अब मेरा अपना कोई नहीं बचा। द'र्द कैसे बयां करूं?”
सबसे बड़ा द'र्द यह है कि परिवार लंबे समय से पक्के घर का इंतजार कर रहा था। अमन ने सरकारी आवास के लिए कई बार आवेदन किया था। इस बार प्रधानमंत्री आवास योजना में उसका आवेदन स्वीकृत भी हो गया था। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द नया घर मिलेगा, लेकिन पैसे आने से पहले ही वह घर, जिसमें सपने बसते थे, छह जिंदगियों की क'ब्र बन गया।
अब अमन के सामने जिंदगी तो है, लेकिन उसे जी'ने की वजह देने वाला पूरा परिवार उससे हमेशा के लिए छिन चुका है।

image