2 ore - Tradurre

10 अगस्त 1932 जब भारतीय हॉकी ने लॉस एंजिल्स में लहराया तिरंगा
भारतीय हॉकी के स्वर्णिम इतिहास में 10 अगस्त का दिन बेहद खास है। वर्ष 1932 में आज ही के दिन लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर लगातार दूसरी बार ओलंपिक चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। भारत ने इससे पहले 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीता था। हॉकी इंडिया के रिकॉर्ड में 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक भारत के स्वर्णिम पदकों की सूची में दर्ज है।
लॉस एंजिल्स में भारतीय टीम की कप्तानी लाल शाह बोखारी ने की थी और टीम में महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। फाइनल मुकाबले में भारत ने अमेरिका को 24-1 से करारी शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इस ऐतिहासिक जीत में ध्यानचंद ने अकेले आठ गोल दागकर भारतीय विजय में अहम भूमिका निभाई थी। जबकि उनके भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए थे।
यह उपलब्धि उस दौर में भारतीय हॉकी के दबदबे का प्रतीक थी। 1928 में शुरू हुआ ओलंपिक स्वर्णिम अभियान 1932 में भी जारी रहा और इसके बाद 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत ने लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता। ध्यानचंद के नेतृत्व में मिली बर्लिन की सफलता ने भारतीय हॉकी के उस स्वर्णिम युग को और ऊंचाई दी।
10 अगस्त की यह ऐतिहासिक उपलब्धि आज भी भारतीय हॉकी के लिए प्रेरणा है।जब मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों के कौशल और गोलों की गूंज ने दुनिया को बता दिया था कि हॉकी की दुनिया में भारत का दबदबा कायम है।

image