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पैसों से नहीं, दिल की दौलत से अमीर हैं पश्चिम बंगाल के सालाप बाज़ार के गोपाल डे। करीब 60 बरसों से वो अपनी छोटी-सी रसोई में बेहद कम दाम पर खाना परोसते आ रहे हैं — ताकि कोई दिहाड़ी मज़दूर, रिक्शेवाला या ज़रूरतमंद कभी भूखे पेट न सोए।
बाज़ार में महंगाई बढ़ती रही, राशन और गैस के दाम आसमान छूते रहे — लेकिन गोपाल डे के सेवा भाव में कभी कोई कमी नहीं आई। उनके परिजनों का साथ और लोगों की दिल से निकली दुआएँ ही उनकी सबसे बड़ी दौलत हैं।
आज जब हर कारोबार का एकमात्र मक़सद मुनाफा कमाना रह गया है, तब गोपाल डे हमें यह सीख देते हैं कि सच्ची समृद्धि बैंक के खाते में नहीं, उन मुस्कानों और दुआओं में होती है जो किसी भूखे को खाना खिलाने से मिलती हैं। ऐसे गुमनाम इंसान को दिल से सलाम। 🙏❤️
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