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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उन सभी पुण्यात्माओं को भावपूर्ण नमन, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका के बीच असहनीय पीड़ा सहते हुए भी अदम्य साहस, धैर्य और मानवता का परिचय दिया।
सांप्रदायिक विभाजन की वह त्रासदी केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं थी, बल्कि इसने असंख्य परिवारों को अपनों से अलग कर दिया, घर-आँगन उजाड़ दिए और करोड़ों सपनों को हमेशा के लिए अधूरा कर दिया। लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, आजीविका, संपत्ति और जीवनभर की स्मृतियों को पीछे छोड़कर विस्थापन की असहनीय वेदना झेलनी पड़ी।
विभाजन का वह दर्द आज भी हमारी सामूहिक स्मृतियों में जीवित है। यह इतिहास का केवल एक काला अध्याय नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना में अंकित ऐसी शाश्वत पीड़ा है, जो हमें मानवता, एकता और भाईचारे के महत्व का सदैव स्मरण कराती रहेगी।

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