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*दादी जी आदि है, मध्य यही, दादी जी सृष्टि का सार*
*इस चराचर जगत के कण-कण में दादी जी अमर विस्तार*
*ये निर्मल अंतरतम का अंबर ये चेतन मन की प्यास*
*दादी जी सरस शुचि साधना दादी जी अनंत प्रभास*
*🔱।। जय दादी की।।🔱*
*‼️मात् श्री राणी सती दादी की जय‼️*

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