क्या Mobile फोन सच में इंसान को ज़िंदा लाश बना रहा है?
Social media और Reels की लत ने लोगों का मानसिक संतुलन इस कदर बिगाड़ दिया है कि उन्हें अपने आस-पास का भी होश नहीं रहता।
हाल ही में सामने आए एक Video में एक महिला Mobile में इतनी खोई थी कि दुकान बंद होने के बाद एक चलती गाड़ी पर जा बैठी और अचानक ज़मीन पर गिर गई।
कुछ लोग इसे महज़ एक Funny Video मानकर हंस रहे हैं, लेकिन यह हंसने की नहीं बल्कि बेहद शर्मनाक और डरावनी स्थिति है।
आज की पीढ़ी तकनीक की गुलाम हो चुकी है और अपने बुनियादी होश खो चुकी है।
क्या हमें ऐसी तकनीक की सच में ज़रूरत है जो इंसानी समझ और सुरक्षा को ही दांव पर लगा दे?
इस अंधे Digital दौर पर आपकी क्या राय है?