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नगर निगम की राजपुरा स्थित गौशाला का औचक निरीक्षण कर चल रहे निर्माण कार्य देखा एवं अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए, ​​निरीक्षण के अंत में मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में यह कहा गया कि :
​निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
​चारे, पानी और दवाइयों की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
​हर एक कर्मचारी अपनी डयूटी को नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र सेवा भाव मानकर निभाए।
गौवंश की सेवा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर परोपकार और आस्तिकता से जुड़ी है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह एक नैतिक अपराध भी है, क्योंकि "इस सेवा और कर्मों का हिसाब हमें ऊपर वाले (ईश्वर) को भी देना होता है।"

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