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नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर॥
अमर महाकाव्य 'श्रीरामचरितमानस' के रचयिता, भक्तिधारा के महान कवि, 'पूज्यपाद' गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई।
उन्होंने अपनी दिव्य कृतियों के माध्यम से प्रभु श्री राम के आदर्शों, सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों के अमृत संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। उनका कालजयी साहित्य लोकमंगल का शाश्वत पथप्रदर्शक है।

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