सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले रसोइयों व कर्मियों को मिलने वाला ₹2,000 का मासिक मानदेय बेहद कम बताया जा रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच इतनी कम राशि में परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।

इन कर्मचारियों पर सिर्फ खाना बनाने की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि बर्तन साफ करने, स्कूल परिसर की सफाई और दूसरे कामों का बोझ भी रहता है। कई जगह मानदेय समय पर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

कर्मियों की मांग है कि उन्हें काम के मुताबिक उचित न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान और बेहतर सेवा सुविधाएं मिलें। साथ ही, उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर उससे जुड़े लाभ देने की मांग भी लंबे समय से उठ रही है।

सवाल यही है—इतनी जिम्मेदारी के बदले ₹2,000 महीना कितना न्यायसंगत है?

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