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चिराग पासवान ने संविधान और आरक्षण को लेकर एक बार फिर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि “जब तक चिराग पासवान जिंदा है, तब तक न संविधान को कोई खतरा है, न आरक्षण को कोई खतरा है।” उन्होंने यह बात अपने पिता की कसम खाते हुए कही और आरक्षण व संविधान को लेकर लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश की।
चिराग के इस बयान पर ब्रह्मचारी परमहंस महाराज ने बेहद तीखी और व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने चिराग के माता-पिता के विवाह और उनके पारिवारिक संदर्भ को लेकर सवाल उठाते हुए कहा तुम्हारे पिताजी ने अपनी जाति की स्त्री को नकारते हुए तुम्हारी माताजी से विवाह किया और तुम्हे जन्म दिया.. कहीं ना कहीं वो जानते थे कि उनके वंश में विद्वता हेतु यह करना ही होगा..
खैर.. तुम चांदी का चम्मच मुंह में लेकर भी दलित शोषित पिछड़ा ही रह गए ।

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