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बिहार की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगातार बढ़ते सरकारी खर्च, कल्याणकारी योजनाओं और कर्ज का असर वित्तीय स्थिति पर दिखाई दे रहा है। हर व्यक्ति पर करीब 28 हजार रुपये का कर्ज होने का अनुमान बताया गया है।

राज्य सरकार की ओर से लोगों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिन पर बड़ी राशि खर्च होती है। दूसरी ओर, सरकार की आय के मुकाबले खर्च और कर्ज का दबाव वित्तीय प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है।

हालांकि, बिहार की अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत रही है। 2026-27 के बजट में राजकोषीय घाटे को करीब 3 प्रतिशत तक रखने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं, 2025-26 के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 11.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

यानी बिहार के सामने एक तरफ विकास और जनकल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ कर्ज और सरकारी खर्च को नियंत्रित रखने की चुनौती भी है।

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