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दोनों हाथ नहीं, फिर भी पैर की उंगलियों से बच्चों का भविष्य संवार रहे शिक्षक

झारखंड के धनबाद के गोविंदपुर स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक मो. अकबर अंसारी दोनों हाथ न होने के बावजूद पैर की उंगलियों से ब्लैकबोर्ड पर लिखकर बच्चों को पढ़ाते हैं।

बचपन से दिव्यांगता और सामाजिक तानों का सामना करने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। 1999 में मैट्रिक, 2001 में इंटर और 2009 में IGNOU से ग्रेजुएशन पूरा किया। दिसंबर 2005 से वे इसी स्कूल में लगातार सेवाएं दे रहे हैं।

शुरुआत में 2 हजार रुपये के मानदेय से सफर शुरू करने वाले अकबर अंसारी आज 20 हजार रुपये मानदेय पर पत्नी और तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। करीब 20 साल की सेवा के बाद भी उन्हें स्थायी शिक्षक का दर्जा नहीं मिला है।

मुश्किलें कितनी भी हों, हौसला हो तो रास्ता जरूर निकलता है। See less

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