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स्वरा भास्कर ने दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर सवाल उठाते हुए इसकी प्रस्तुति की आलोचना की थी। उनका कहना था कि ब@ला@त्का@र जैसी हिं@सा को महिला के जीवन और सम्मान का अंत मानने वाली सोच पर सवाल उठना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई ब@ला@त्का@र पी@ड़िता या सर्वाइवर यह फिल्म देखे, तो उसे ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि उसने अपनी ‘इज्जत’ बचाने के लिए आ@त्म@ह@त्या नहीं की, इसलिए वह कायर है।

स्वरा की आ@पत्ति मूल रूप से उस संदेश को लेकर थी, जो जौहर के दृश्य से दर्शकों तक पहुंच सकता है। इस मुद्दे ने फिल्म की कहानी, ऐतिहासिक जौहर की परंपरा और महिलाओं की गरिमा को लेकर काफी ब@ह@स छेड़ी। ‘पद्मावत’ में जौहर को जिस तरह सिनेमाई रूप दिया गया, उसे लेकर उस समय समर्थन और विरोध—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

इस ब@ह@स का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि किसी भी यौन हिंसा के लिए पीड़िता जिम्मेदार नहीं होती और ऐसी घट@ना उसके जीवन, सम्मान या भविष्य का अंत नहीं है। किसी सर्वाइवर की हिम्मत इस बात से तय नहीं होती कि उसने कैसी प्रतिक्रिया दी, बल्कि यह समझना जरूरी है कि उसके साथ हुई हिंसा उसकी गलती नहीं थी।

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