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22 साल बाद भी शहीद की मां अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं…

देश की हिफाजत करते हुए जान न्योछावर करने वाले शौर्य चक्र विजेता शहीद सहायक कमांडेंट स्व. विवेक सक्सेना का परिवार आज भी अपने अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। सरोजनीनगर तहसील में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब शहीद की 80 वर्षीय मां सावित्री सक्सेना ने अपनी पीड़ा सामने रखी।

बेटे की शहादत के 22 साल बाद भी न्याय और अपने हक के लिए इंतजार कर रही मां ने यहां तक कह दिया कि अगर सरकार उनके परिवार की समस्या नहीं सुन सकती, तो वह बेटे को मिले वीरता पदक, सम्मान और सम्मान राशि सरकार को लौटाना चाहती हैं।

जिस बेटे ने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन दे दिया, उसके परिवार को अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़े—यह सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से जुड़ा है जो अपने शहीदों और उनके परिवारों के सम्मान की बात करती है।

शहीद का ब@लिदान कभी नहीं लौटाया जा सकता, लेकिन उसके परिवार को न्याय और सम्मान जरूर मिलना चाहिए। 🇮🇳

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