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लद्दाख के कारगिल जिले की 24 वर्षीय स्टैंजिन त्सांगयांग ने भारतीय सेना में शामिल होकर इतिहास रच दिया है। वह कारगिल से भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला आर्मी ऑफिसर बनी हैं। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में पले-बढ़े युवाओं के बड़े सपनों की भी मिसाल है। 🇮🇳🎖️

लद्दाख की जंस्कार घाटी में ऊंचे पहाड़ों और कड़ाके की ठंड के बीच पली-बढ़ीं स्टैंजिन ने कम उम्र से ही चुनौतियों का सामना करना सीखा। बेहतर शिक्षा और भविष्य के लिए उन्होंने अपना घर और गांव छोड़ दिया। लेह के लैमडॉन मॉडल स्कूल में पढ़ाई के दौरान वह करीब 14 साल तक परिवार से दूर हॉस्टल में रहीं। अपनी पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें स्कॉलरशिप मिली और इसके बाद उन्होंने असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

आर्मी ऑफिसर बनने का सपना उनके कॉलेज के दिनों में NCC से जुड़ने के बाद और मजबूत हुआ। परिवार या समुदाय में पहले से कोई सैन्य पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद उन्होंने ऑलिव ग्रीन यूनिफॉर्म पहनने और देश की सेवा करने का सपना देखा। इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों, त्याग और डाउट के दौर से गुजरना पड़ा, लेकिन माता-पिता के अटूट समर्थन और अपने पहाड़ों से मिली हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। 💪

5 सितंबर 2026 को ऑफिसर कैडेट (महिला) स्टैंजिन त्सांगयांग ने परेड ग्राउंड पर कारगिल जिले की पहली महिला अधिकारी बनने की उपलब्धि हासिल की। इंडियन आर्मी की Army Training Command ने भी उनकी जर्नी को X पर शेयर किया और इसे ‘पहाड़ों से ऑलिव ग्रीन्स तक’ नाम दिया।

स्टैंजिन की कहानी बताती है कि देश के सबसे दूर-दराज इलाकों में देखे गए सपने भी मेहनत, हिम्मत और सही समर्थन के साथ सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंच सकते हैं। 🇮🇳✨

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