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समुद्र में बहकर जाने वाले नदियों के मीठे पानी को रोककर उसका इस्तेमाल करने की भारत की महत्वाकांक्षी योजना अब चर्चा में है। गुजरात सरकार की कल्पसर परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी में करीब 60 से 64 किलोमीटर लंबा बांध या डाइक बनाने की योजना है। इसके जरिए लगभग 7,800 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) मीठे पानी को इकट्ठा कर एक विशाल तटीय मीठे पानी का जलाशय तैयार किया जाएगा। 🌊💧

इस परियोजना के तहत साबरमती, माही, धाधर और नर्मदा जैसी नदियों के अपवाह और समुद्र में बह जाने वाले मीठे पानी को जलाशय में रोका जाएगा। इससे करीब 1,600 से 2,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली विशाल कृत्रिम मीठे पानी की झील तैयार होने की उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा फायदा गुजरात के सूखाग्रस्त सौराष्ट्र क्षेत्र को मिलेगा।

परियोजना के जरिए सौराष्ट्र के 9 जिलों और 42 तालुकों में करीब 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे पानी की कमी के कारण होने वाले फसल नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कल्पसर परियोजना का फायदा सिर्फ पानी तक सीमित नहीं रहेगा। खंभात की खाड़ी पर बनने वाले बांध के साथ सड़क और रेल कॉरिडोर से भावनगर और सूरत के बीच की दूरी कम होने की उम्मीद है। इससे यात्रा, परिवहन और ईंधन की लागत घट सकती है और क्षेत्र में व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है।

परियोजना के तहत करीब 2,470 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन का भी प्रस्ताव है। वहीं, इसकी अनुमानित निर्माण लागत करीब ₹1.25 लाख करोड़ से ₹1.33 लाख करोड़ के बीच बताई गई है। गुजरात सरकार इस परियोजना पर काम कर रही है, जिसमें केंद्र सरकार और नीदरलैंड्स की तकनीकी विशेषज्ञता भी शामिल है।

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