हमारे समाज में रिश्तों के नाम तो बराबर हैं, लेकिन उनके साथ जुड़ी उम्मीदें आज भी बराबर नहीं हैं।
दामाद आए तो स्वागत की तैयारी, और बहू लौटे तो जिम्मेदारियों की सूची तैयार।
सवाल काम करने का नहीं, सवाल उस सोच का है जो एक को मेहमान और दूसरी को हमेशा जिम्मेदार मानती है। घर सबका है, तो अपनापन और जिम्मेदारियाँ भी सबकी होनी चाहिए। #facebookviral