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खेलों के खराब सिस्टम से हारीं खिलाड़ी बेटियां हमारी
प्रेमा विश्वास और दिव्यांशी चौधरी की पीड़ा खेलों का दुखद अध्याय
खेलपथ शब्द-सहयात्री
ग्वालियर। खेल के मैदान में हारना कोई बड़ी बात नहीं। खिलाड़ी हारता है, फिर उठता है, मेहनत करता है और अगली प्रतियोगिता में जीत की तलाश करता है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी मैदान में नहीं बल्कि खेल व्यवस्था के खराब सिस्टम से हार जाए, तो उसका दर्द कहीं ज्यादा गहरा होता है। प्रेमा विश्वास और दिव्यांशी चौधरी की कहानी आज हमारे खेल तंत्र के सामने ऐसा ही सवाल खड़ा कर रही है।

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