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मध्य प्रदेश के इंदौर से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक दर्दनाक मामला सामने आया है जहां 13 सितंबर को अस्पताल में दम तोड़ने वाली बुजुर्ग लता बाई के पार्थिव शरीर को उनके चार-चार सगे बेटों में से किसी ने भी अपनाने से साफ मना कर दिया। बेटों की इस बेरहमी के चलते बुजुर्ग मां का शव पूरे तीन दिनों तक मर्च्युरी में लावारिसों की तरह पड़ा रहा। बताया जा रहा है कि अपनी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई से मां ने जिस फ्लैट को खरीदा था बेटों ने पहले उसे अपने नाम लिखवाकर मां को बेसहारा छोड़ दिया जिसके बाद बीते आठ महीनों से वे समाजसेवियों के सहारे एक वृद्धाश्रम में दिन काट रही थीं। कलयुगी बेटों द्वारा अंतिम विदाई तक देने से इनकार किए जाने के बाद आखिरकार जानकी वृद्धाश्रम और प्रीयू फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारी उठाई और बुधवार को रीजनल पार्क मुक्तिधाम में पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया।

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