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कारगिल युद्ध में 1 बिहार रेजिमेंट के नायक शत्रुघ्न सिंह ने जिस अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया, वह आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देता है।

29 मई 1999 को बटालिक सेक्टर के प्वाइंट 4268 पर दुश्मन की मजबूत स्थिति के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उनके दाहिने पैर में गोली लगी। चलने में असमर्थ होने के बावजूद उन्होंने घायल साथियों की मदद की और लगातार कवरिंग फायर देते रहे। इसी दौरान उन्होंने दो विदेशी लड़ाकों को मार गिराया।

इसके बाद वे करीब 11 दिनों तक दुश्मन की पोस्ट के पास बेहद कठिन परिस्थितियों में घायल अवस्था में पड़े रहे। जब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा तो उन्होंने रेंगते हुए तीन किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर भारतीय सेना की फर्म बेस तक पहुंचकर अपनी जान बचाई।

वे अपने साथ हथियार, LMG का गोला-बारूद और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर लौटे। उनकी असाधारण वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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