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भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने करीब एक दशक बाद सेंसर बोर्ड में अमूल चूल परिवर्तन किए हैं। एक तरफ जहां पंकज त्रिपाठी, प्रीति जिंटा, रूपाली गांगुली और पल्‍लवी जोशी जैसे 18 दिग्‍गजों को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के सदस्‍यों के तौर पर शामिल किया गया है, वहीं इस पुनर्गठन के साथ ही अब मंत्रालय ने फिल्‍म सर्टिफिकेशन की गाइडलाइंस में नए न‍ियम भी जोड़े हैं। इनमें कहा गया है कि फिल्मों को समाज के मूल्यों और मानकों के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए। लिहाजा, हिंसा, ड्रग्‍स सेवन और उकसाने वाले शब्‍दों पर नकेल कसी गई है, वहीं एक दिलचस्‍प नियम पड़ोसी और अच्‍छे संबंधों वाले व‍िदेशी मुल्‍को को लेकर भी जोड़ा गया है, जिसके बाद सलमान खान की फिल्‍म 'मातृभूमि' के अब तक अटके होने की वजह समझ आती है।
मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस में उन उद्देश्यों को बताया गया है जिन पर CBFC को थिएटर में दिखाने के लिए फिल्मों को सर्टिफिकेशन देने से पहले विचार करना चाहिए।

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