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ॐ वामनाय नमः 🙏
🗓️ श्री वामन प्राकट्योत्सव: 23 सितंबर 2026, बुधवार
🗓️ द्वादशी तिथि: 22 सितंबर रात 09:43 बजे से 23 सितंबर रात 10:50 बजे तक
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को भगवान विष्णु के वामन अवतार का पावन प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान वामन बटुक ब्रह्मचारी के रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे और तीन पग भूमि मांगी।
वामन अवतार को भगवान विष्णु का प्रमुख अवतार माना जाता है, श्रीमदभागवत पुराण में वामन अवतार का उल्लेख मिलता है।
वामन भगवान के उपनयन संस्कार में ऋषि आंगिरस ने वस्त्र, अगस्त्य ने मृगचर्म, सूर्य ने छत्र, गुरु देव नें जनेऊ तथा कमण्डल, मरीचि ने पलाश दण्ड, भृगु ने खड़ाऊं, अदिति ने कोपीन, कुबेर ने भिक्षा पात्र तथा देवी सरस्वती ने रुद्राक्ष माला दी है।
इसके बाद वामन भगवान पिता की आज्ञा लेकर राजा बलि के पास गए।
इस दिन भगवान वामन या श्रीहरि का पूजन करें। पीले पुष्प, तुलसी दल, फल, मिष्ठान और सात्त्विक भोग अर्पित करें। “ॐ वामनाय नमः” मंत्र का जाप करें और वामन अवतार की कथा पढ़ें या सुनें।
इस दिन सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र, छाता, जलपात्र या उपयोगी सामग्री का दान भी किया जाता है।

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