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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
उनकी लेखनी से निकला ओज, वाणी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचकर स्वाभिमान और राष्ट्रचेतना की लौ प्रज्वलित करता रहा है। उनके शब्दों में राष्ट्रप्रेम की भावना और जन-मन को जागृत करने वाली ऊर्जा समाहित है।
राष्ट्रचेतना के इस महान साधक की स्मृति को कृतज्ञ प्रणाम। 🙏

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