2 uur - Vertalen

मणिपुर के बिश्नुपुर में एक किसान परिवार की बेटी थी… जिसे बचपन में मार्शल आर्ट देखकर वुशु से प्यार हो गया। शायद तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन यही लड़की एशियन गेम्स में भारत का इतिहास लिखेगी।
नाम है रोशिबिना देवी।
किसान परिवार में पली-बढ़ी रोशिबिना ने छोटी उम्र में वुशु की ट्रेनिंग शुरू की। परिवार की जिम्मेदारियां थीं, साधन सीमित थे, लेकिन इस बेटी के सपने बड़े थे।
सुबह अभ्यास…
फिर घंटों मेहनत…
और परिवार से दूर रहकर लगातार प्रशिक्षण।
धीरे-धीरे वही छोटी लड़की भारतीय वुशु की पहचान बनती चली गई।
2018 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक आया।
2023 में उन्होंने रजत पदक जीता।
और अब 2026 में…
एक बार फिर रजत।
लेकिन इस पदक की चमक इसलिए और खास है क्योंकि रोशिबिना लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वुशु खिलाड़ी बन गई हैं।
बिश्नुपुर के खेतों से शुरू हुआ सफर अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है।
बीच में मुश्किलें भी आईं, इस बार एशियन गेम्स की टीम में जगह को लेकर अनिश्चितता रही। लेकिन जब मौका मिला, तो रोशिबिना ने अपने खेल से जवाब दिया।
एक किसान की बेटी…
एक छोटे से शहर की लड़की…
और तीन एशियन गेम्स, तीन पदक।
ये कहानी सिर्फ जीत की नहीं है।
ये उस लड़की की कहानी है जिसने बहुत छोटी उम्र में एक खेल को अपना सपना बनाया और फिर साल-दर-साल उसी सपने के पीछे चलती रही।
मणिपुर की मिट्टी से निकली रोशिबिना ने फिर बता दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, बस उन्हें पूरा करने का हौसला होना चाहिए।
#roshibinadevi #wushu #asiangames2026 #manipur #indiaatasiangames

image