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कभी पढ़ाई के लिए साबुन और चश्मे बेचे, आज 37 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी बदल चुके हैं!

वाराणसी के डॉ. सुबोध कुमार सिंह की कहानी संघर्ष और सेवा की ऐसी मिसाल है, जो लंबे समय तक याद रहती है।

पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनके सामने थी। पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने मुश्किल हालात में साबुन और चश्मे तक बेचे, लेकिन परिस्थितियों को अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। मेहनत के दम पर डॉक्टर बने और बाद में उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के इलाज को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया।

पिछले 21 वर्षों में डॉ. सुबोध कुमार सिंह 37 हजार से ज्यादा बच्चों की मुफ्त सर्जरी कर चुके हैं। वे खास तौर पर कटे होंठ और तालू की समस्या से जूझ रहे बच्चों का इलाज करते हैं। इस सेवा से न सिर्फ बच्चों को इलाज मिला, बल्कि उनके परिवारों को भी एक नई उम्मीद मिली।

कभी अपनी पढ़ाई के लिए संघर्ष करने वाले डॉ. सुबोध आज उन परिवारों के लिए सहारा बने हैं, जो अपने बच्चों के इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते।

उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने अपनी मुश्किलों को सिर्फ याद नहीं रखा, बल्कि उन्हीं मुश्किलों से निकली समझ को दूसरों की मदद में लगा दिया। ❤️🙏

संघर्ष से निकलकर दूसरों के लिए उम्मीद बन जाना ही शायद सफलता का सबसे खूबसूरत रूप है।

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