तृतीय पातशाह श्री गुरु अमर दास जी के ज्योति-जोत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।

गुरु साहिब ने मानवता को निस्वार्थ सेवा, समानता और सद्भाव का मार्ग दिखाया तथा ‘पहले पंगत, पाछे संगत’ की महान परंपरा स्थापित की।

उनकी शिक्षाएं हम सभी को सदैव सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी।

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