19 horas - Traducciones

1857 की क्रांति में बलिदान देने वाले जाट राजा....
राजा नाहर सिंह- राजा नाहर सिंह तेवतिया बल्लभगढ़ रियासत के राजा थे। 1857 की क्रांति के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और 134 दिन तक अंग्रेजों को दिल्ली में नहीं घुसने दिया था, इसलिए अंग्रेजों ने उन्हें दिल्ली की लोहे की दीवार के नाम से पुकारा था। बाद में धोखे से बन्दी बनाकर 9 जनवरी 1858 को उन्हें फांसी की सजा दी थी। उन्हें सरेआम चांदनी चौक पर फांसी दी गयी। उनके आखिरी शब्द थे कि भारत माता के लिए उठी इस चिंगारी को बुझने मत देना।
राजा देवी सिंह आर्य- राजा देवी सिंह गोदर टप्पा राया मथुरा के एक पहलवान एवं बजरंग बली के भक्त थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई और अपने क्षेत्र को आजाद करके वहां अपना राज स्थापित कर लिया था। दिल्ली के बादशाह बहादुर शाह जफर ने उनकी राजा की उपाधि को मान्यता प्रदान की थी। बाद में अंग्रेजों ने फिर से हमला किया और धोखे से उन्हें बन्दी बना लिया गया। बाद में अंग्रेजों द्वारा उन्हें सरेआम फांसी दी गयी।
राजा बाबा शाहमल सिंह तोमर- ये बागपत से थे इन्होंने 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए थे। इन्होने अपने क्षेत्र से अंग्रेजी शासन समाप्त करके राजा की उपाधि धारण कर ली थी। बाद में अंग्रेजों के हमले के दौरान उनसे लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
राजा अमानी सिंह- राजा अमानी सिंह ठकुरैला लग्समा क्षेत्र के राजा थे। इगलास एवं गोंडा इनकी राजधानी रही थी। 1857 में अंग्रेजों ने हमला किया इन्होंने उन्हें हरा दिया और दूसरे हमले के दौरान उनसे धोखाधड़ी करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया व उन्हें अंग्रेजों ने फांसी दे दी।
इन वीरों ने हमारे लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी लेकिन कितने शर्म की बात है कि आज हम इनके बारे में जानते तक नहीं।
#jatking

image